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B'day Special - उदारवादी अर्थव्यवस्था का जनक, जिसने भारत के बाजार को खोला विश्व के लिए B'day Special - उदारवादी अर्थव्यवस्था का जनक, जिसने भारत के बाजार को खोला विश्व के लिए

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B’day Special – उदारवादी अर्थव्यवस्था का जनक, जिसने भारत के बाजार को खोला विश्व के लिए

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नई दिल्ली। देश के पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह आज 87 वर्ष के हो गए हैं। दो बार प्रधानमंत्री रह चुके मनमोहन सिंह को विश्व पीएम से ज्यादा एक सफल अर्थशास्त्री के रूप में जानता है। एक और बात जो उन्हें लेकर हमेशा चर्चा में रहती है वह है शांत स्वभाव। आइए उनके जन्मदिन पर हम आपको बताते हैं उनसे जुड़ी कुछ महत्वपूर्ण बातें…

  • यहां हुआ था जन्म

पूर्व प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह का जन्म 26 सितंबर 1932 को अविभाजित भारत के पंजाब (अब पाकिस्तान) के एक गांव में हुआ था। वर्तमान में वह राजस्थान से राज्यसभा सदस्य हैं।  

  • कैंब्रिज विश्वविद्यालय से की है पढ़ाई

मनमोहन सिंह ने 1948 में पंजाब विश्वविद्यालय से 10वीं की परीक्षा पास की और आगे की पढ़ाई के लिए विदेश चले गए। ब्रिटेन के कैंब्रिज विश्वविद्यालय से साल 1957 में उन्होंने प्रथम श्रेणी से अर्थशास्त्र में ग्रेजुएट हुए। साल 1962 में उन्होंने ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय के नूफील्ड कॉलेज से अर्थशास्त्र में पीएचडी की। 

  • अर्थशास्त्र के शिक्षक बने

पीएचडी कर डॉक्टर की उपाधि लेने के बाद मनमोहन सिंह ने पंजाब विश्वविद्यालय और दिल्ली स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स में अर्थशास्त्र भी पढ़ाया। शिक्षक के रूप में भी वह छात्रों के पसंदीदा रहे। उन्हें जिनेवा में दक्षिण आयोग के महासचिव के रूप में भी नियुक्त किया गया था। 

  • वित्त मंत्रालय में सलाहकार रहे

1971 में डॉ सिंह वाणिज्य मंत्रालय में आर्थिक सलाहकार और 1972 में वित्त मंत्रालय में मुख्य आर्थिक सलाहकार रह चुके हैं। इसके बाद के वर्षों में वे योजना आयोग के उपाध्यक्ष, रिजर्व बैंक के गवर्नर, प्रधानमंत्री के आर्थिक सलाहकार और विश्वविद्यालय अनुदान आयोग(यूजीसी) के अध्यक्ष भी रहे।

  • यहां से शुरू हुई राजनीतिक पारी 

मनमोहन सिंह साल 1991 में असम से राज्यसभा सदस्य चुने गए। इसके बाद वह साल 1995, 2001, 2007 और 2013 में फिर राज्यसभा सदस्य रहे। 1998 से 2004 तक जब भाजपा सत्ता में थी, तब वही राज्यसभा में विपक्ष के नेता थे। साल 2004 में जब कांग्रेस सत्ता में आई, तो डॉ. मनमोहन सिंह प्रधानमंत्री बनाए गए। साल 2009 में एक बार फिर कांग्रेस सत्ता बचाने में कामयाब रही और एक बार फिर डॉ. सिंह प्रधानमंत्री बने। 

  • प्रधानमंत्री ने जताया भरोसा और मनमोहन ने किया सबका मुंह बंद

90 के दशक में मनमोहन सिंह ने आर्थिक उदारीकरण को उपचार के रूप में प्रस्तुत किया और भारतीय अर्थव्यवस्था को विश्व बाज़ार के साथ जोड़ दिया। डॉ॰ मनमोहन सिंह ने आयात और निर्यात को भी सरल बनाया। लाइसेंस एवं परमिट गुज़रे ज़माने की चीज़ हो गई। निजी पूंजी को उत्साहित करके रुग्ण एवं घाटे में चलने वाले सार्वजनिक उपक्रमों हेतु अलग से नीतियाँ विकसित कीं। नई अर्थव्यवस्था जब घुटनों पर चल रही थी, तब पी. वी. नरसिम्हा राव को कटु आलोचना का शिकार होना पड़ा। विपक्ष उन्हें नए आर्थिक प्रयोग से सावधान कर रहा था। लेकिन राव ने मनमोहन पर पूरा यक़ीन रखा। मात्र दो वर्ष बाद ही आलोचकों के मुँह बंद हो गए और उनकी आँखें फैल गईं।

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पीएम का तख्त हिलाने दिल्ली जा रहा यह मुख्यमंत्री !, कहा – बचके रहना…

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जी हां, बिल्कुल सही सुना आपने। देश के एक बड़े राज्य का मुख्यमंत्री, प्रधानमंत्री का तख्त हिलाने दिल्ली कूच कर रहा है। समर्थकों ने इस मुख्यमंत्री को लेकर एक मैसेज भी सोशल मीडिया में वायरल किया है। लिखा है कि –

“मोदी जी! है बस इतना कहना
ये भूपेश बघेल है, बचके रहना”

इसके बाद ये भी लिखा है कि ” रमन सिंह ने एक बार समझने में ग़लती की थी, 15 साल का मुख्यमंत्री काल 14 सीट पर आ गया। आपके तो अभी 5 साल हुए हैं…सोच लो बस! भगवान आपको सदबुद्धि दे।”

ऐसे में दाउ याने की मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के समर्थक इशारों- इशारों में ये कह रहे हैं कि अगले लोकसभा चुनाव में भाजपा 9 सीटों तक ही सिमटकर रह जाएगी। खैर, बात बहुत हास्यास्पद है लेकिन इस मैसेज से लगता तो यही है। वैसे ये पूरा मामला धान खरीदी के मुद्दे को लेकर है। जिसे लेकर कांग्रेस ने विधानसभा चुनाव में बड़ा वादा किया था लेकिन केंद्र सरकार ने इसे लेकर अड़ंगा डाल दिया है।

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छन से जो टूटे कोई सपना- जग सुना सुना लागे, जग सुना सुना लागे

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साल 2007 मे आय रिहिस शाहरूख खान और दीपिका पादुकोण के पिच्चर ओम शांति ओम के ये गाना ल जानत हव न। इही गाना के बोल ह फिलहार तो छत्तीसगढ़ के वो नेता मन बर एकदम सटीक बैठथे जेन मन पिछु कुछ महिना ले महापौर बने बर फिल्डिंग करत रिहिस।

छत्तीसगढ़ के दाऊ यानि के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ह एकच झटका में सबो दावेदारों के सपना ल कुचर के रख दिस। पहिली तो जनता ह महापौर ल चुनत रिहिस, लेकिन अब पार्षद मन ह अपन मुखिया के चुनाव करही। अइसने में कुछ-कुछ नेता मन ह एकदम कन्फ्यूजा गे हे कि करन त का करन किके?

टिकिट के आस में पहिली ले अपन आका मन के सेवा और जनता मन ल मक्खन लगाए के बाद अब सरकार के ये नवा फरमान ले तो टेंशन ल बढ़ा दे हे। पहिली तो खाली जनता मन ल मक्खन मारे के रहाय, अब तो पार्षदी बर वार्ड में जुगाड़ अउ बाकी पार्षद मन घलो मक्खन लगाय के पढ़ी।

एकर तो चांदीच चांदी होगे रे

ये पूरा खेल में सबले जादा वजन तो निर्दलीय के मन के होगे। दोनों प्रमुख दल करा अपन महापौर बनाय बर बहुमत बर रेस होही। अइसने में ये निर्दलीय पार्षद मन ह तुरूप के एक्का साबित हो सकथे। खैर एकरो बर अभी ले फिल्डिंग जमाय के चालू होगे हे।

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एक बार चूके तो क्या हुआ… कोशिश की और बॉल सीधे गोल पोस्ट के अंदर

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एक बार चूके तो क्या हुआ… कोशिश की और बॉल सीधे गोल पोस्ट के अंदर

छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के बारे में तो सुना होगा आपने… लोग उन्हें दाउ कह कर बुलाते हैं। दाउ ने छत्तीसगढ़ में कांग्रेस की डूबती हुई नैय्या को पार लगाया और ऐसा लगाया कि भाजपा की बोलती बंद कर दी। जिस तरह राजनीति के मैदान में दाउ जी ने बड़ा गोल मारकर 15 साल बाद कांग्रेस की सरकार बनाई, वैसे ही बीते दिन फुटबाल के मैदान में भी जौहर दिखाया।

मुख्यमंत्री जी यहां स्व. राजेश पटेल स्पोर्ट्स काम्प्लेक्स का उद्घाटन करने पहुंचे थे। तो यहां के फुटबाल मैदान में किक मारने पहुंच गये। गोलकीपर बने उनके करीबी और युवा विधायक देवेंद्र यादव… पहले प्रयास में तो मुख्यमंत्री गोल दागने से चूक गए लेकिन फिर भी हार नहीं मानी और दूसरे प्रयास में बॉल को गोल पोस्ट तक पहुंचा ही दिया। देखिये भूपेश दाउ की शानदार किक…

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