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महाराष्ट्र में शह और मात का खेल खत्म, कोर्ट ने सुना दिया सुप्रीम फैसला महाराष्ट्र में शह और मात का खेल खत्म, कोर्ट ने सुना दिया सुप्रीम फैसला

अगुआ

महाराष्ट्र में शह और मात का खेल खत्म, कोर्ट ने सुना दिया सुप्रीम फैसला

कहां पहले भाजपा- शिवसेना का समीकरण फिर शिवसेना- एनसीपी- कांग्रेस का और आखिर में बिना ब्रश किये देवेंद्र फडणवीस ने अजीत पवार के साथ मिलकर सरकार भी बना ली।

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लो भई, महाराष्ट्र को लेकर कोर्ट ने आज अपना सुप्रीम फैसला सुना दिया है। फैसला भी कुछ ऐसा कि दो दिन पहले ही खिला हुआ कमल शायद मुरझा जाए। अब सिसायत चीज ही कुछ ऐसी है कि कब क्या हो जाए किसी को नहीं पता।

कहां पहले भाजपा- शिवसेना का समीकरण फिर शिवसेना- एनसीपी- कांग्रेस का और आखिर में बिना ब्रश किये देवेंद्र फडणवीस ने अजीत पवार के साथ मिलकर सरकार भी बना ली। 

खैर ये सब तो आप जानते ही हैं। फिलहाल बात करते हैं कोर्ट के सुप्रीम फैसले की। तो भाई कोर्ट ने साफ तौर पर कह दिया कि 27 नवंबर यानि के बुधवार शाम पांच बजे तक विधायकों की शपथ पूरी हो जाए वो भी लाइव….  साथ ही फ्लोर टेस्ट भी…

अगुआ

कांग्रेस छोड़ रहे हैं सिंधिया !

सिंधिया के अचानक ट्विटर प्रोफाइल के इस बदलाव को एक बड़े संकेत के तौर पर देखा जा रहा है।

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मियां हड़बड़ाइये नाहि, पहले पूरी बात तो सुन लीजिए। अभी कोई ऐलान थोड़ी न हुआ है बस अटकलें हैं ये तो। लंबे समय से नाराज चल रहे ज्योतिरादित्य सिंधिया ने अपने ऑफिशियल ट्विटर एकाउंट से अपना कांग्रेसी परिचय  हटा दिया है। इसके बाद से ये चर्चा आम हो गई कि सिंधिया कांग्रेस छोड़ रहे हैं। फिलहाल उन्होंने अपने नए बायो में उन्होंने खुद को सिर्फ जनसेवक और क्रिकेट प्रेमी बताया है।

सिंधिया के अचानक ट्विटर प्रोफाइल के इस बदलाव को एक बड़े संकेत के तौर पर देखा जा रहा है। ज्योतिरादित्य सिंधिया ने इससे पहले अपने ट्विटर प्रोफाइल पर अपना पद- कांग्रेस महासचिव, गुना लोकसभा सीट से सांसद (2002-2019 तक) और पूर्व केन्द्रीय मंत्री लिखा था। अब उन्होंने इसे हटाकर खुद को समाज सेवक और क्रिक्रेट प्रेमी लिखा है।

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अगुआ

पीएम का तख्त हिलाने दिल्ली जा रहा यह मुख्यमंत्री !, कहा – बचके रहना…

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जी हां, बिल्कुल सही सुना आपने। देश के एक बड़े राज्य का मुख्यमंत्री, प्रधानमंत्री का तख्त हिलाने दिल्ली कूच कर रहा है। समर्थकों ने इस मुख्यमंत्री को लेकर एक मैसेज भी सोशल मीडिया में वायरल किया है। लिखा है कि –

“मोदी जी! है बस इतना कहना
ये भूपेश बघेल है, बचके रहना”

इसके बाद ये भी लिखा है कि ” रमन सिंह ने एक बार समझने में ग़लती की थी, 15 साल का मुख्यमंत्री काल 14 सीट पर आ गया। आपके तो अभी 5 साल हुए हैं…सोच लो बस! भगवान आपको सदबुद्धि दे।”

ऐसे में दाउ याने की मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के समर्थक इशारों- इशारों में ये कह रहे हैं कि अगले लोकसभा चुनाव में भाजपा 9 सीटों तक ही सिमटकर रह जाएगी। खैर, बात बहुत हास्यास्पद है लेकिन इस मैसेज से लगता तो यही है। वैसे ये पूरा मामला धान खरीदी के मुद्दे को लेकर है। जिसे लेकर कांग्रेस ने विधानसभा चुनाव में बड़ा वादा किया था लेकिन केंद्र सरकार ने इसे लेकर अड़ंगा डाल दिया है।

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अगुआ

छन से जो टूटे कोई सपना- जग सुना सुना लागे, जग सुना सुना लागे

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साल 2007 मे आय रिहिस शाहरूख खान और दीपिका पादुकोण के पिच्चर ओम शांति ओम के ये गाना ल जानत हव न। इही गाना के बोल ह फिलहार तो छत्तीसगढ़ के वो नेता मन बर एकदम सटीक बैठथे जेन मन पिछु कुछ महिना ले महापौर बने बर फिल्डिंग करत रिहिस।

छत्तीसगढ़ के दाऊ यानि के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ह एकच झटका में सबो दावेदारों के सपना ल कुचर के रख दिस। पहिली तो जनता ह महापौर ल चुनत रिहिस, लेकिन अब पार्षद मन ह अपन मुखिया के चुनाव करही। अइसने में कुछ-कुछ नेता मन ह एकदम कन्फ्यूजा गे हे कि करन त का करन किके?

टिकिट के आस में पहिली ले अपन आका मन के सेवा और जनता मन ल मक्खन लगाए के बाद अब सरकार के ये नवा फरमान ले तो टेंशन ल बढ़ा दे हे। पहिली तो खाली जनता मन ल मक्खन मारे के रहाय, अब तो पार्षदी बर वार्ड में जुगाड़ अउ बाकी पार्षद मन घलो मक्खन लगाय के पढ़ी।

एकर तो चांदीच चांदी होगे रे

ये पूरा खेल में सबले जादा वजन तो निर्दलीय के मन के होगे। दोनों प्रमुख दल करा अपन महापौर बनाय बर बहुमत बर रेस होही। अइसने में ये निर्दलीय पार्षद मन ह तुरूप के एक्का साबित हो सकथे। खैर एकरो बर अभी ले फिल्डिंग जमाय के चालू होगे हे।

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