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हटके

कछमच्छी #1: गपक्कड़ों का कारखान

खुरचनभाइ फिर से खाना-खजाना की बात करने लगे. अब उनकी बातों को न सुनते हुए भी सुनने का स्वांग करते रहे. आखिर साबूत बचने का यही एक तरीका बच गया लगता था. खुरचनभाइ ने चाय की चुस्की लेते हुए अपनी बातें शुरू दी.

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खाना भी नाना प्रकार के होते हैं। भ्रम में ना रहें, मैं किसी खाने वाली चीज के विषय नहीं बताने जा रहा हूँ! अब तो आप समझ ही गए होंगे कि किस खाने की बात कर रहा हूँ। नहीं ना समझे…ओह, अब क्या बताएं आपको, मेरे साथ इतने दिन घूमने-टहलने के बाद भी आपके अक्ल की चाभी मिली नहीं। इतना बुद्धिवर्द्धक चूर्ण (खैनी) खाने के बाद भी दिमाग भोथ ही रह गया, स्मार्ट नहीं बन सके आप। आपको एक वो कहावत याद दिलाता हूँ जो आप पर एकदम से फिट बैठता है – ‘चालि प्रकृति बेमाए, तीनू संगे जाए’. आपकी आदत जो है सो नहीं ही बदलने वाली है!

खुरचनभाई ज्ञान पिलाए जा रहे थे। उस दिन वे थोड़े हल्के मूड में थे। पहली बार ऐसा लग रहा था कि वो चिंता-फ़िक्र को ताक पर रख आए हैं। अमूमन उनके ललाट पर कम से कम तीन लाइन खिंची होती थी जो उस दिन कहीं नदारद दिखीं।

शाम के पांच बाज रहे थे, चाय का समय हो चला था। मन में विचार ही उठ रहे थे कि कोई चाय पिलाता तो अच्छा होता। तभी भीतर अंगने से गुलटन चाय लेकर हाजिर हो गया। खुरचनभाई के चेहरे पर जैसे मुस्कान तैर उठी। वो झटपट ट्रे के दो कप चाय में से एक उठाते हुए चुस्की लेने लगे। चाय की दो-चार चुस्की लेने के बाद खुरचनभाई बोल उठे, खाने की बात शुरू की और पीना नसीब हुआ! चाय पीने के बाद बुद्धिवर्द्धक चूर्ण खिलाएंगे आपको!

खुरचनभाई फिर से खाना-खजाना की बात करने लगे। हम उनकी बातों को न सुनते हुए भी सुनने का स्वांग करते रहे। आखिर साबूत बचने का यही एक तरीका बच गया लगता था। खुरचनभाई ने चाय की चुस्की लेते हुए अपनी बातें शुरू दी।

आह…चाय है कि कमाल है, आखिर भोजन के मामले में मिथिला की कोई तुलना ही नहीं है। बस यहां कारखाने का ही अभाव है। मुझसे रहा नहीं गया, बोला- यहां के लोग इतने बुद्धिमान, चालाक, विद्वान, गुणवान हैं, फिर कारखाने का अभाव…बात कुछ हजम नहीं हुआ। खुरचनभाई ने स्पष्ट करते हुए कहा, कारखाना दो शब्द कार और खाना से मिलकर बना है। इधर सड़कें ऐसी हैं कि कार चलना मुश्किल, जहां-तहां फंस जाती हैं. और यहां के लोग खाना खाते ही आलस से तनकर सो जाते हैं। यही कारण है कि यहां के लोगों को कारखाना सूट ही नहीं करता है!

मैंने कहा, भगवान ही जब वाम हो गए हैं तो…! सरकार की उदासीनता इस क्षेत्र में कारखाने की दुर्दशा के लिए दायी है। खुरचनभाई मुंहमलीन करते हुए बोले, ओह…कौन कहता है कि इस क्षेत्र में कारखाना नहीं है! उनकी इस बात पर मैंने आश्चर्य करते हुए बोला, दिमाग तो ठीक है आपका या फिर फ्यूज उड़ गया है आजकल! अभी खुद आपने कहा है कि यहां कारखाने का अभाव है और अभी बात से पलट गए!

मेरी इस बात पर खुरचनभाई जोर से हंसते हुए बोले, ओह…बोलकर फिर उससे पलट जाने की कला सीख रहा हूँ। क्योंकि अगर राजनीति में पैठ बनानी है तो इस क्वालिटी का होना बहुत जरूरी है! लेकिन मैंने अभी कोई पलटी नहीं मारी है, जरा समझने का फेर है। मेरा कहना ये है कि मिथिला में गपक्कड़ों का कारखाना, गप्प का कारखाना सब जगह है! बातों पर बस अमल नहीं होता, अगर होने लगे तो ये क्षेत्र देश का सबसे विकसित क्षेत्र बन जाएगा। लेकिन यहां तो बातों की फैक्ट्री लगी है, काम-धंधा तो है नहीं! मैंने कहा, पहले चाय पी लीजिए, नहीं तो गप देने के चक्कर में वो भी ठंढी हो जाएगी। खुरचनभाई बेधड़क चाय सुरकने में मशगूल हो गए!

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ऐसी प्रेमकथा तो फिल्मों में ही मिलती है भाईसाब…

दरअसल भोपाल में रहने वाले एक सॉफ्टवेयर इंजीनियर ने अपनी पत्नि को तलाक देने का फैसला किया। इसके पीछे की वजह ये थी कि पत्नि उसके साथ खुश नहीं थी। तमाम कोशिशों के बाद भी जब बात नहीं बनी तो दोनों ने यह फैसला लिया।

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प्रेमकथा तो बहुत सी सुनी होंगी आपने, आपकी खुद की भी होगी ही लेकिन ये वाली हटके है। ऐसी वाली तो आपने सिर्फ फिल्मों में ही देखी होगी। आइए हम बताते हैं ये वाला मामला…

मामला है मध्यप्रदेश के भोपाल का, जहां एक पति अपनी पत्नि को तलाक देने जा रहा है। वजह जानकर पहले तो हम भी हैरान हुए और फिर सोचा कि ये कुछ अलग है तो आपको भी बता ही दिया जाए।

दरअसल भोपाल में रहने वाले एक सॉफ्टवेयर इंजीनियर ने अपनी पत्नि को तलाक देने का फैसला किया। इसके पीछे की वजह ये थी कि पत्नि उसके साथ खुश नहीं थी। तमाम कोशिशों के बाद भी जब बात नहीं बनी तो दोनों ने यह फैसला लिया।

अजी तनिक रूकिए, असली कहानी यहां से शुरू हो रही है। दोनों के बीच खुशी नहीं रहने का कारण भी जान लीजिए भई। मामला कुछ ऐसा है कि पत्नि का शादी से पहले से ही एक अन्य युवक से प्रेम संबंध था जो अब भी चल रहा है। युवक के अलग जाति के होने की वजह से लड़की के पिता ने उसकी शादी सॉफ्टयवेयर इंजीनियर से करा दी। लेकिन तब से ही दोनों साथ होकर भी साथ नहीं हो पाए। शादी के सात साल बीत जाने औऱ दो बच्चे बीत जाने के बाद युवक अचानक वापस आ गया औऱ महिला उसकी खातिर घर छोड़ने को तैयार हो गई। नेकिदल पति ने भी अपनी पत्नि की खुशी के लिए उससे अलग होने का फैसला कर लिया।

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छत्तीसगढ़ का ये नृत्य इससे पहले कभी नहीं देखा होगा आपने

हमारा दावा है कि इसके पहले शायद ही आपने प्रदेश की इस नृत्य शैली को कहीं देखा होगा। सोशल मीडिया के माध्यम से हमारे एक मित्र ने इसे हम तक पहुंचाया, तो हमने सोचा आप भी हमारे मित्र ही हैं आपका देखना तो बनता ही है…. आइए देखते हैं ये शानदार डांस…

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छत्तीसगढ़ आज अपने स्थापना की 19वीं वर्षगांठ मना रहा है। मध्यप्रदेश से अलग होकर एक आदिवासी बाहुल्य राज्य के रूप अलग हुआ छत्तीसगढ़ विभिन्न कलाओं से परिपूर्ण है। यहां के लोकनृत्य की भी देश में अपनी अलग ही पहचान है। सुआ नृत्य, चंदेनी, राउत नाचा. पंथी नृत्य सहित अनेकों लोकनृत्य यहां बहुत प्रचलित हैं। आज राज्य के स्थापना दिवस में हम भी आपको एक नृत्य दिखाने जा रहे हैं।

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कनाडा में रचने जा रहा इतिहास, सिटी काउंसिल ने सिक्ख समुदाय को दिया अनमोल तोहफा

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कनाडा में रचने जा रहा इतिहास, सिटी काउंसिल ने सिक्ख समुदाय को दिया अनमोल तोहफा

कनाडा के बैंपटन सिटी की डिक्सी रोड अब गुरूनानक स्ट्रीट के नाम से जानी जाएगी। यहां की सिटी काउंसिल ने गुरूनानक देव के प्रकाश पर्व के मौके पर सिक्ख समुदाय को ये अनमोल तोहफा दिया है। शहर के इस इलाके में इंडो- कनाडाई लोगों का वर्चस्व है।

यहां के क्षेत्रीय पार्षदों गुरप्रीत सिंह ढिल्लों और नगर पार्षद हरकीरत सिंह ने एक प्रस्ताव रखा था कि सिख धर्म के संस्थापक गुरु नानक देव जी के 550वें प्रकाश पर्व के सम्मान में रोड का नाम श्री गुरु नानक देव जी के नाम पर रखा जाना चाहिए। इस प्रस्ताव को सर्वसम्मति से पास कर दिया गया है। ब्रैंप्टन में रहने वाले दो लाख सिखों ने इस पर प्रशंसा की। प्रस्ताव पारित होने के बाद पार्षद ढिल्लों ने कहा कि ब्रैंप्टन दुनिया की सबसे बड़ी सिख आबादी में से एक है।

डिक्सी रोड पर बड़ा गुरुद्वारा साहिब भी है, जहां पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु रोजाना माथा टेकने आते हैं। ब्रैंप्टन ईस्ट से सांसद मनिंदर सिद्धू मैनी ने कहा कि कनाडा में यह एक नया इतिहास लिखा जा रहा है। अब श्री गुरु नानक देव के प्रकाशोत्सव पर गुरु नानक स्ट्रीट जनता को समर्पित कर दी जाएगी। सिद्धू ने कहा कि समूची सिख समुदाय के लोगों में इससे खुशी की लहर है। वहीं डिक्सी रोड पर कारोबार करने वाले परम सिद्धू का कहना है कि 550वें प्रकाशोत्सव पर यह तोहफा अनमोल है और इससे संगत में खासा उत्साह है।

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