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अमित जी के फैन तो बहुत देखे होंगे आपने, आइए मिलाते हैं उनके कूलर या यूं कहें कि एयर कंडीशन से….

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शहंशाह, सदी के महानायक, एंग्री यंगमैन, बिग बी और न जाने कितने नाम…. लेकिन काम सिर्फ एक… लोगों के दिल में राज करना। जी हां बात हो रही है अमिताभ बच्चन की, जो आज अपना 77वां जन्मदिन मना रहे हैं। सात हिंदुस्तानी फिल्म से अपना करियर शुरू करने वाले बिग बी आज उस शिखर पर काबिज हैं जिसका हर कोई केवल सपना ही देख पाता है। उनके जन्मदिन पर हम लाए हैं एक ऐसे शख्स की कहानी जो अमिताभ जी को अपना भगवान मानता है। जिसकी रोजी रोटी अमिताभ से है और हर खुशी भी अमिताभ से। आइए बताते हैं आपको इस शख्स के बारे में …

कल अचानक छत्तीसगढ़ के भिलाई शहर में जाना हुआ तो सुपेला जा पहुंचे। वहां नजर पड़ी एक पान ठेले पर… नाम था बच्चन पान पैलेस। चारों तरफ सिर्फ बच्चन ही बच्चन। यहां बच्चन साहब पूजे जाते हैं…. और बच्चन मंत्र भी पढ़ा जाता है। मैंने अपनी पूरी जिंदगी में शायद पहली दफा अमित जी का ऐसा फैन देखा था तो इस शख्स के बारे में और जानने की मेरी उत्सुकता बढ़ती जा रही थी और मैंने अचानक ही पूछ लिया कि –

भैय्या नाम क्या है आपका ?

जवाब आया…. देवा यादव….  वही अग्निपथ वाले विजय दीनानाथ चौहान जैसा स्टाइल।

फिर मैंने पूछा कि ये सब क्या है तो … सामने से जवाब आया – इज्जत की कमाते है साहब, इज्जत की खाते है, किसी के सामने हाथ नही फैलाते।

मैं भी नहीं रूका और फिर पूछ डाला कि, जीवन में करना क्या चाहते हो ये सब दिखाकर तो जवाब आया कि – “हम जहां खड़े हो जायें, लाइन वहीं से शुरू हो “

इतने में मुझे ये तो समझ आ गया था कि ये बंदा अमित जी का फैन नहीं बल्कि कूलर और एयर कंडीशन याने की सुपर फैन है। फिर नजर पड़ी इस पान पैलेस के अंदर जहां सिर्फ अमित जी ही दिखाई पड़े। भगवान भी अमित जी, और मंत्र भी अमित जी का ही…. इतना ही नहीं देवा का स्टाइल भी वही 80 दशक का अमित का फेमस हेयर स्टाइल जैसा, पहनावा भी वही बेल बॉटम पैंट और ढीली ढाली शर्ट…..

आगे बढ़ने का मन हुआ तो फिर इस पूरी कहानी के बारे में जानने की कोशिश की…. कि आखिर ऐसी दीवानगी कैसे… ? तो देवा ने बताया कि जब से होश संभाला है तो सिर्फ बच्चन को ही देखा है। उठते- बैठते, जागते- सोते, खाते- पीते सिर्फ बच्चन ही दिखाई देते हैं। उनकी हर फिल्म को मैंने सिर्फ देखा नहीं बल्कि महसूस किया है। वो मेरे लिए भगवान हैं, जिनसे मेरी रोजी रोटी चल रही है। इतना ही नहीं आज लोग भी मुझे बच्चन के नाम से ही बुलाते हैं। मेरे मसीहा मेरी पहचान बन चुके हैं।

देवा कहते हैं कि मेरी जिंदगी की शुरूआत भी अमित जी से और अंत भी उनसे ही …

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एक वोट से जीतकर शुरू हुई थी सरदार की राजनीतिक पारी, उनसे जुड़ी ये बातें शायद ही जानते होंगे आप…

देश के पहले गृहमंत्री सरदार पटेल वैसे तो एक वक्त कांग्रेस पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष भी रहे हैं लेकिन क्या आपको पता है कि उनकी राजनीतिक पारी शुरू कहां से हुई थी… ?

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एक वोट से जीतकर शुरू हुई थी सरदार की राजनीतिक पारी, उनसे जुड़ी ये बातें शायद ही जानते होंगे आप...

हां, वही सरदार जिन्होंने सभी रियासतों का विलय भारत में कराया था। वही सरदार जिन्हें देश की एकता का सूत्रधार भी कहा जाता है। आज उनकी जयंती पर हम बताते हैं आपको उनसे जुड़े कुछ रोचक किस्से, जो शायद ही जानते होंगे आप …

देश के पहले गृहमंत्री सरदार पटेल वैसे तो एक वक्त कांग्रेस पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष भी रहे हैं लेकिन क्या आपको पता है कि उनकी राजनीतिक पारी शुरू कहां से हुई थी… ?

सिर्फ एक वोट से उनकी राजनीतिक पारी शुरू हुई, वो भी एक पार्षद के रूप में…. सिर्फ एक वोट से जीत दर्जकर सरदार ने अपना लोहा मनवाना शुरू किया था। अपने माता- पिता की चौथी संतान सरदार पटेल का जन्म गुजरात के नडियाद में हुआ था। 16 साल की उम्र में ही उनका विवाह हो चुका था। हालांकि तब तक उन्होंने हाईस्कूल भी पास नहीं की थी। जी हां, ये सच है कि सरदार ने 22 साल की उम्र में हाईस्कूल पास की थी।

पार्षद, मेयर से लेकर देश के पहले गृहमंत्री तक

सरदार पटेल ने 1917 में अहमदाबाद के दरियापुर सीट से पार्षद चुनाव जीता। इसके बाद 1924 में निगम के मेयर भी बने। सरदार भारतीय राजनीति के उन शीर्ष नेतृत्वों में शुमार हुए जिनका लोहा पूरी दुनिया मानती है।

गुजराती टाइपिंग के लिए करवाई टाईपराइटर की व्यवस्था

सरदार पटेल ने सबसे पहले गुजराती भाषा में टाइपिंग करने के लिए टाईपराइटर की व्यवस्था कराई और फिर अहमदाबाद नगर निगम ने रेमिंगटन कंपनी को 4000 रुपए दिए ताकि गुजराती भाषा में टाईपराइटर बनाया जा सका।

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95 साल की उम्र में भी काम कर रहा अमेरिका का राष्ट्रपति रह चुका यह शख्स, वजह जानकर हैरान रह जाएंगे आप…

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95 साल की उम्र में भी काम कर रहा अमेरिका का राष्ट्रपति रह चुका यह शख्स, वजह जानकर हैरान रह जाएंगे आप...

दुनिया के सबसे ताकतवर देश के राष्ट्रपति रह चुके जिमी कार्टर ने दो दिनों पहले ही अपना 95वां जन्मदिन मनाया। इस लिहाज से वो अमेरिका के इतिहास में सबसे ज्यादा उम्र तक जिंदा रहने वाले राष्ट्रपति बन गए हैं। लेकिन गौर कीजिए हम यहां आपको उनकी उम्र या कोई राजनीतिक किस्सा नहीं बता रहे हैं। हम आज आपको बताने वाले हैं जिमी की उस नेक पहल की, जिससे आज हजारों लोग अपने घर में रह रहे हैं। चलिए बढ़तें हैं अब आगे

जिमी कार्टर, जो 1977 से 1981 तक अमेरिका के राष्ट्रपति रहे हैं। जिमी को नोबेल पुरस्कार से भी सम्मानित किया जा चुका है। पिछले तीन सालों से जिमी चौथे स्टेज के कैंसर से जूझ रहे थे लेकिन इसके बावजूद जरूरतमंदों के लिए कुछ करने की उनकी इच्छाशक्ति आज भी वैसे की वैसे ही है जो 36 वर्ष पूर्व जागृत हुई थी। जिमी और उनकी पत्नी रोजलीन पिछले 36वर्षों से गरीब, बेसहारा परिवारों को घर दिला चुके हैं। उम्र के इस पड़ाव में भी यह दंपत्ति बिना थके गरीबों को जिंदगी को खुशहाल बनाने प्रयास कर रही है। इस दंपत्ति की पुनीत पहल से अब तक हजारों गरीब परिवारों को घर मिल चुका है।  

दे दी अपनी संपत्ति ताकि….

जिमी ऐसे शख्स हैं जिन्होंने गरीबों की मदद को हमेशा प्राथमिकता दी है। हाल ही दिनों में उन्होंने एक छोटे कस्बे में एक नया हेल्थ क्लिनिक शुरू किया था, क्योंकि इस शहर में कई महीनों से कोई फिजिशियन नहीं था। यही नहीं उन्होंने अपने होम टाउन के आधे लोगों को बिजली उपलब्ध कराने के लिए अपनी निजी संपत्ति को भी सोलर बिजली घर बनवाने के लिए दे दिया।

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BhilaiWatch Special- खमतराई का गांधी चौक कैसे बना गांधी चौक…

राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की जयंती पर आज हम लाएं हैं आपके लिए छत्तीसगढ़ से जुड़े उनके कुछ किस्से

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1969 में हुआ था गांधीजी का जन्म, हां यही... आप भी सुनिये

भोजन और अच्छी सी नींद के बाद फिर से आपके बीच आ गए हैं हम, बापू का छत्तीसगढ़ से जुड़ा एक और किस्सा लेकर। ये किस्सा है एक ऐसे चौराहे का जिसका नाम बापू के नाम पर पड़ गया और एक ऐसे शख्स का जिसने बापू को कराई थी अपने कंधे की सवारी। आइए बताते हैं आपको..

बात है 20 दिसंबर 1920 की, जब बापू धमतरी में किसानों के सत्याग्रह का नेतृत्व करने रायपुर पहुंचे थे। इस सत्याग्रह के बारे में हम आपको पहले ही बता चुके हैं। हां, तो वापस आ जाते हैं इस किस्से पर। यहां महात्मा गांधी को बैरिस्टर ठक्कर के बंगले में ठहराया गया। गांधीजी के साथ खिलाफत आंदोलन के प्रमुख नेता शौकत अली और मुहम्मद अली भी आए। जिसके बाद शाम को संतोषी नगर खमतराई में महात्मा गांधी ने एक सभा को संबोधित किया। पुराने लोग बताते हैं कि बापू की आमसभा के बाद इस चौक का नाम उनके नाम पर रख दिया गया और आज यह गांधी चौक के नाम से प्रसिद्ध है। उस सभा के बाद से ही यह स्थान पूरे छत्तीसगढ़ की सार्वजनिक गतिविधियों का केंद्र बन गया।

और इस शख्स ने बापू को उठा लिया अपने कंधों पर

रायपुर में आमसभा को संबोधित करने के ठीक एक दिन बाद बापू शौकत बंधुओं के साथ धमतरी पहुंचे थे। मकईबंध चौक जो गांधी जी को देखने के लिए जनसैलाब लिये तैयार खड़ा था। भीड़ इतनी कि सेठ हुसैन के बाड़े तक पहुंच पाना असंभव नजर आ रहा था। जिनके यहां भाषण की व्यवस्था की गई थी। इसी बीच गुरूर के व्यापारी उमर सेठ ने बापू को अफने कंधे पर उठा लिया और मंच तक ले गये।

Source- Sahapedia

कहीं जाइयेगा नहीं, पिक्चर अभी बाकी है मेरे दोस्त…

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